पटना न्यूज डेस्क: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस बार चुनाव में बड़े राजनीतिक प्रयोग कर रही है। पार्टी ने खासतौर से बेगूसराय और पटना में नई रणनीति अपनाई है। बेगूसराय में भाजपा ने केवल दो सीटें अपने लिए रखीं और एक सीट, जिसे उसने हजार से भी कम अंतर से गंवाया, सहयोगी चिराग पासवान को सौंप दी। इस कदम का विरोध केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कर चुके हैं। वहीं, पटना में पार्टी ने पुराने और स्थापित नेताओं की जगह अपेक्षाकृत नए चेहरों को मौका दिया है।
पटना की दानापुर सीट पर भाजपा ने पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव को मैदान में उतारा है। पिछली बार यहां राजद के रीत लाल यादव ने भाजपा की आशा देवी को 15,924 मतों से हराया था। रामकृपाल यादव ने अपनी राजनीतिक शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी और बाद में भाजपा के माध्यम से केंद्र तक का सफर तय किया। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें राजद की मीसा भारती ने पाटलिपुत्र से हराया था। हार के बावजूद रामकृपाल यादव लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे और अब उन्हें दानापुर सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिला है।
पटना साहिब सीट पर भाजपा ने लगातार सात बार विधायक रहे और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव का टिकट काट दिया। इस बार पार्टी ने युवा और कम पहचाने गए रत्नेश कुमार कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। रत्नेश प्रदेश सचिव और भाजपा जल प्रबंधन मंच के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और पटना महानगर भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं।
कुम्हरार सीट से भी भाजपा ने पुराने विधायक अरुण कुमार सिन्हा को बेटिकट कर दिया। पिछले चुनाव में उन्होंने राजद के धर्मेंद्र कुमार को 26,463 मतों से हराया था। इस सीट पर युवा और नए चेहरे संजय गुप्ता को मौका मिला है। संजय गुप्ता पटना के जीडी पाटलिपुत्रा स्कूल और वाणिज्य महाविद्यालय के छात्र रह चुके हैं और बिहार भाजपा के प्रदेश सचिव तथा भारतीय जनता युवा मोर्चा के राज्य महासचिव भी रह चुके हैं।