पटना न्यूज डेस्क: पटना में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से दियारा इलाके में बाढ़ का खतरा और गहरा गया है। नदी का पानी खतरे के निशान से डेढ़ फुट ऊपर बह रहा है, जिससे सात पंचायतों के गांव चारों ओर से पानी से घिरकर टापू में बदल गए हैं। खेतों से लेकर सड़कों तक दो से तीन फुट तक पानी फैला हुआ है और घरों के भीतर भी डेढ़ फुट तक पानी घुस आया है। हालात इतने खराब हैं कि लोग अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। यहां तक कि स्कूल और अस्पताल जैसी जरूरी सुविधाएं भी बाढ़ की चपेट में आ गई हैं।
किसानों और पशुपालकों के लिए यह बाढ़ किसी संकट से कम नहीं है। पहले आई बाढ़ ने ही सैकड़ों हेक्टेयर में लगी मक्का, सब्जी और चारे की फसल को नष्ट कर दिया था। अब फिर से पानी बढ़ने से बची-खुची खेती भी बर्बाद हो गई है। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है और पशुओं के लिए चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लोग प्रशासन से राहत सामग्री और मुआवजा देने की गुहार लगा रहे हैं।
बाढ़ नियंत्रण केंद्र की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार शाम को देवनानाला पर गंगा का जलस्तर 168.50 फुट रिकॉर्ड किया गया है। गंगहरा, हेतनपुर, पतलापुर, कासीमचक, पुरानी पानापुर, मानस और अकिलपुर पंचायतों के कई गांव पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या संपर्क टूटने की है, जिससे आने-जाने और जरूरी सामान की आपूर्ति रुक गई है।
प्रशासन ने हालात को देखते हुए तैयारी तेज कर दी है। एसडीओ दिव्या शक्ति ने बताया कि दियारा क्षेत्र में गांवों को जोड़ने के लिए नाव और स्टीमर की व्यवस्था की गई है। नासरीगंज घाट से पुरानी पानापुर घाट तक सरकारी स्टीमर चलाया जा रहा है ताकि लोग सुरक्षित आवाजाही कर सकें। हालांकि इलाहाबाद और बनारस में गंगा का जलस्तर घटा है और बक्सर व इंद्रपुरी में पानी स्थिर है, लेकिन दियारा क्षेत्र के ग्रामीण अभी भी बाढ़ के कहर से जूझ रहे हैं।