पटना न्यूज डेस्क: पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) जल्द ही शोध और नवाचार का बड़ा केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। संस्थान में केंद्रीय मानकों के अनुरूप एथिकल कमेटी बनाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। यह कमेटी स्वास्थ्य मंत्रालय के हेल्थ रिसर्च विभाग के तहत डीजी ड्रग्स अथॉरिटी में निबंधित की जा रही है। इसके बाद पीएमसीएच को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से मान्यता मिलेगी और साथ ही यह दवा परीक्षण केंद्र (डीटीसी) बनने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।
प्राचार्य डॉ. कौशल किशोर ने बताया कि इस एथिकल कमेटी का प्रारूप पूर्व शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ए.के. जायसवाल की अध्यक्षता में तैयार किया गया है। वहीं, कमेटी के सचिव डॉ. पंकज हंस की देखरेख में इसके स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को अंतिम रूप देकर स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिया गया है।
एथिकल कमेटी के गठन के बाद पीएमसीएच के पीजी छात्र, फैकल्टी और शोधकर्ता अपने शोध प्रस्ताव केंद्रीय स्तर पर भेज पाएंगे। कमेटी द्वारा नैतिक जांच के बाद उन्हें स्वीकृति मिलेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में रिसर्च पेपर प्रकाशित करने का रास्ता आसान होगा। इतना ही नहीं, संस्थान को आइआइटी, एनआइटी जैसे तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर नई नवाचार परियोजनाओं पर काम करने का भी अवसर मिलेगा।
फिलहाल बिहार में सिर्फ आइजीआइएमएस, आरएमआरआइ और एक अन्य संस्थान में ही ऐसी कमेटी मौजूद है। पीएमसीएच इसके जुड़ने वाला चौथा संस्थान बन जाएगा। डॉ. किशोर का कहना है कि एथिकल कमेटी से न केवल शोध की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि संस्थान की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान भी और मजबूत होगी। इसका सीधा फायदा छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को मिलेगा।